Friday, 1 January 2021

रात भर -प्रभुदयाल खट्टर की कविता

 हर रोज 

शाम को सूर्य तो अस्त हो जाता  है  ,

किंतु इस जगत का अभियान 

रहता है जारी  

रात भर 

लड़ेने के लिए अंधेरों से ....

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प्रभुदयाल खट्टर copyright -2007 

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रात भर -प्रभुदयाल खट्टर की कविता

 हर रोज  शाम को सूर्य तो अस्त हो जाता  है  , किंतु इस जगत का अभियान  रहता है जारी   रात भर  लड़ेने के लिए अंधेरों से .... --- प्रभुदयाल खट्टर...