Friday, 1 January 2021

रात भर -प्रभुदयाल खट्टर की कविता

 हर रोज 

शाम को सूर्य तो अस्त हो जाता  है  ,

किंतु इस जगत का अभियान 

रहता है जारी  

रात भर 

लड़ेने के लिए अंधेरों से ....

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प्रभुदयाल खट्टर copyright -2007 

Tuesday, 29 December 2020

उन्होंने कहा कि वे सब कुछ कर सकते हैं

 


जो भगवान ने आपके लिए तय किया ...
उन्होंने कहा कि वे सब कुछ कर सकते हैं उन्होंने कहा जब मैंने उनसे भगवान को लाने के लिए कहा इस पृथ्वी पर
उन्होंने कहा कि वे इसे नहीं कर सकते
जब मैंने उनसे आकाश का एक टुकड़ा लाने को कहा मेरी इस टेबल पर
उन्होंने कहा कि वे इसे नहीं कर सकते
जब मैंने उन्हें सूरज लाने के लिए कहा मेरी प्रयोगशाला में
उन्होंने कहा कि वे इसे नहीं कर सकते
जब मैंने उनसे एक बदलाव लाने को कहा दिन और रात बनाने के चक्र में 48 घंटे के लिए एक दिन
उन्होंने कहा कि वे इसे नहीं कर सकते
फिर मैंने कहा कि क्या तुम इतनी सारी चीजें नहीं बना सकते तब मत कहो क्योंकि तुम सब कुछ कर सकते हो आपको पता होना चाहिए कि जब तक भगवान इसे मंजूर नहीं करते आप सब कुछ नहीं कर सकते आप जो कुछ भी करते हैं, वह केवल ईश्वर ने आपके लिए तय किया है तुम्हे पता हैं...

रात भर -प्रभुदयाल खट्टर की कविता

 हर रोज  शाम को सूर्य तो अस्त हो जाता  है  , किंतु इस जगत का अभियान  रहता है जारी   रात भर  लड़ेने के लिए अंधेरों से .... --- प्रभुदयाल खट्टर...